नेताओं और अधिकारियों ने गोदी मीडिया के साथ मिलकर लोकतंत्र को खोखला कर दिया

 

स्टेट एडिटर विजय कुमार की खास रिपोर्ट 

रांची। गटर के गंदे पानी की तरह तब्दील हो चुकी गोदी मीडिया ने पत्रकारिता को पूरी तरह से नर्क बना दिया है। सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य समेत सैकड़ों सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ आम जनता को नहीं मिल रहा है। सरकारी योजनाओं की हालत काफी बिगड़ी हुई है। जिम्मेदार अफसरों और मंत्रियों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। सरकारी अस्पतालों में समय पर डाॅक्टर नहीं आते हैं। दवाएं भी नहीं मिलती है। भर्ती मरीजों को बेड पर चादर और तकिया तक नहीं दिया जाता है। वेतन और दवा समेत अन्य मद में हर साल धनबाद में सरकारी अस्पतालों पर करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं। सरकारी स्कूलों में बेहतर ढंग से पढ़ाई नहीं होती है। शिक्षकों की भी काफी कमी है। 95 फीसदी बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे हैं। सड़क, बिजली और पानी की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। सरकार व सिस्टम में शामिल अधिकारियों से सवाल करने और समाज को जागरूक करने की बजाय गोदी मीडिया चाटुकारिता कर समाज में दुर्गंध फैला रहा है । लोकतंत्र के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकारों में शामिल गोदी मीडिया ने पत्रकारिता के नाम पर सिर्फ और सिर्फ अपराध किया है और अपराधियों, भ्रष्ट नेताओं व अधिकारियों को संरक्षण देने का काम किया है। सिस्टम में शामिल 95 फीसदी मंत्रियों, नेताओं और अधिकारियों ने गोदी मीडिया के साथ मिलकर लोकतंत्र को खोखला कर दिया है। इसकी बुनियाद ही ध्वस्त कर दी गई है। नगर निगम चुनाव में तो गोदी मीडिया चाटुकारिता की सारी सीमाएं पार कर गई। 50-100 रुपए के लिए प्रत्याशियों के पीछे पीछे सुबह से देर रात तक दुम हिला रही थी। चुनाव जीतने के बाद भी दो दिनों तक वसूली करती रही। चुनाव जिताने के लिए कईयों के समर्थन में खबरें छापी और दिखाई गई। जब वे हार गए तो जीतने वालों के पीछे दौड़ गई। दबंग मेयर की हवेली के बगिया में दो तीन दिनों तक जमावड़ा लगा हुआ था। बिहार का नीतीशवा पलटू कुमार का भी गोदी मीडिया बाप नहीं दादा निकल गया। होली मिलन समारोह में पतल चाटने और बख्शीश मांगने पहुंच गई। अधिकतर लोग तो दो तीन बार बख्शीश ले लिया। पार्षद और मेयर समर्थकों का कहना है कि गोदी मीडिया की हालत लावारिस कुत्तों से भी बदत्तर हो गई है। 

78 सालों से अपराधियों और तस्करों का जूठा खा रही है पुलिस 

लोगों की मानें तो अधिकतर आपराधिक मामलों में पुलिस, अधिकारी और नेताओं का आशीर्वाद अपराधियों को सालों भर मिलता रहता है। यही वजह है कि आजादी के 78 साल बाद भी क्राइम बेकाबू है। अत्याधुनिक संसाधनों से लैस होने के बावजूद रोजाना अपराधियों का नया गैंग तैयार हो रहा है और नए तकनीक से क्राइम करके पुलिस को खुलेआम चुनौती दे रहे हैं। जिसे नेस्तनाबूद करने की औकात पुलिस को नहीं है। क्योंकि पुलिस डिपार्टमेंट में अधिकतर अधिकारी और कर्मचारी अपराधियों और तस्करों से मिले हुए हैं। झारखंड बनने के बाद हालात सुधरने की बजाय बिगड़ती जा रही है। पहले की अपेक्षा क्राइम हजार गुना बढ़ चुका है। लोग कहते हैं कि पुलिस तो अपराधियों और तस्करों का जूठा खा रही है। लोकतांत्रिक व्यवस्था के हिसाब से पुलिस जनता की सेवक है। जनता के टैक्स से ही पुलिस और तमाम सरकारी कर्मचारियों अधिकारियों समेत मंत्रियों और नेताओं को वेतन मिलती है। फिर भी ये लोग करोड़ों अरबों रुपए का घोटाला करते हैं। बगैर रिश्वत के कोई काम नहीं करते हैं। जनता वोट देकर खुश हो जाती है और ये नेता लोग पांच साल देश की संपत्ति लूटते रहते हैं। भ्रष्टाचार और अपराध को बढ़ावा देने वाली भी जनता ही है। जनता एकमत होकर भ्रष्ट नेताओं, सरकारी अधिकारियों और पुलिस का विरोध करे तो बिगड़े हुए सिस्टम को सुधारने में वक्त नहीं लगेगा। लोग कहते हैं कि सबसे बड़ा अपराधी तो गोदी मीडिया है। इसे तो दौड़ा दौड़ा कर जूता चप्पल से पीटना चाहिए। वैसे तो मंथली रुपए देने वाले ही कभी कभार खिलाफ में खबरें छापने और न्यूज चैनल पर प्रसारित करने पर प्रेस क्लब के साथ साथ जहां तहां पिटाई कर देते हैं। एफआईआर दर्ज कराने और गिरफ्तारी नहीं होने पर गोदी मीडिया धरना प्रदर्शन भी करते हैं, लेकिन कुछ भी हासिल नहीं होता है। 

अधिकतर अपराधी विधायक, सांसद और मंत्री बन गए

चोरी पाॅकेटमारी करनेवाला आज शहर का डाॅन बन चुका है। अधिकतर अपराधी विधायक, सांसद और मंत्री बन चुके हैं। जनप्रतिनिधियों पर सैकड़ों केस दर्ज है। चोरी, पाॅकेटमारी, छिनतई और लूटपाट समेत विभिन्न आपराधिक मामलों में जेल जा चुके कई मीडियाकर्मी अखबार और न्यूज चैनलों में हैं। ऐसे लोग लोकतांत्रिक व्यवस्था और पत्रकारिता की छवि धूमिल कर रहे हैं। इसके अलावा कई लोग न्यूज पोर्टल भी चला रहे हैं और उसमें काम भी कर रहे हैं। बगैर रजिस्ट्रेशन के भी कई अखबार, चैनल और न्यूज पोर्टल चल रहा है। जिसपर कार्रवाई नहीं होती है। प्रेस क्लब के कई मेंबर भी पूर्व में जेल जा चुके हैं। प्रेस क्लब के कई मेंबर बीसीसीएल समेत अन्य विभागों के सरकारी क्वार्टरों पर कब्जा कर वर्षों से रह रहे हैं। 

आवेदन की बात कौन करे, क से ज्ञ तक भी लिखना नहीं आता, खुद को कहते हैं बड़े पत्रकार और संपादक 

लोगों का कहना है कि एक आवेदन भी हिंदी में सही से लिख नहीं सकते हैं लेकिन, अपने आपको बहुत बड़े पत्रकार और संपादक समझते हैं। धनबाद की बात करें तो 90 फीसदी लोगों को क से ज्ञ तक भी लिखना नहीं आता है। प्रेस क्लब या प्रेस कॉन्फ्रेंस में बात तो ऐसे करेंगे कि जैसे सरकार को गिराकर राज्य या देश में राष्ट्रपति शासन लागू करवा देंगे। 

तस्करी रोकने में सिस्टम अपाहिज साबित, हिस्सा के लिए गोदी मीडिया का मौन समर्थन 

लोगों का यह भी कहना है कि देश की कोयला राजधानी धनबाद में अकूत खनिज संपदा है और यहां वर्षों से रोजाना करोड़ों की कोयला, बालू और गो तस्करी हो रही है। जिसे रोक पाने में सिस्टम आज तक अपाहिज साबित हुआ है। गोदी मीडिया का मौन समर्थन होने के कारण ही ऐसा हो रहा है। क्योंकि चार हिस्सों में एक हिस्सा गोदी मीडिया को भी मिलता है। गोदी मीडिया में तथाकथित फोटोग्राफर से लेकर रिपोर्टर, डेस्क इंचार्ज, संपादक, प्रधान संपादक और अखबार व न्यूज़ चैनल के मालिक भी होते हैं। यही वजह है कि अब पुलिस, अधिकारी, मंत्री, तथाकथित पत्रकार और नेताओं पर भी हमलें होने की खबरें सामने आने लगी है। लोगों का कहना है कि सांप, बिच्छू और खूंखार जानवर पालेंगे तो हमले के लिए भी तैयार रहिए।

प्रेस क्लब में सजती है नशेड़ियों की महफिल 

जानकारों का कहना है कि रोजाना प्रेस क्लब में रातभर नशेड़ियों की महफिल सजती है। शराब, गांजा से लेकर कई तरह के नशीले पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है। वसूलीबाज अजय ही सालों भर नशेड़ी तथाकथित मीडियाकर्मियों का खर्चा उठाता है। वसूली के पैसे का बंटवारा को लेकर कई बार मारपीट की भी घटनाएं घट चुकी है। थाना में एफआईआर के बाद पुलिस ने छापामारी भी की थी और नशीले पदार्थ भी मिले थे। अपराधी प्रवृत्ति के तथाकथित मीडियाकर्मियों पर प्रेस क्लब के अध्यक्ष की ओर से न तो कार्रवाई की गई और न ही ऐसे लोगों को निष्कासित किया गया। प्रेस क्लब हमेशा गलत तत्वों को संरक्षण देने का कार्य किया है। कलयुगी धृतराष्ट्र और दुर्योधन के राज में सबसे अधिक गुंडाराज देखने और सुनने को मिलता है। शकुनी शर्मा उर्फ काला कौआ तो कोयला चोर के पैसे से शराब पीता है और अय्याशी भी करता है। कई विधवा महिलाओं से भी शर्मा का शारीरिक संबंध है। शर्मा के साथ नाली के किनारे बैठकर शराब पीने वाला बक्सा तो ब्लैकमेलिंग करने वाला अखबार रोजाना बास्कर का संपादक भी बन गया। 

 

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