विजय सिंह की स्पेशल रिपोर्ट
धनबाद : वर्ष 2000 से 2026 में अब तक एक दर्जन से अधिक प्रतिभाशाली पत्रकार लोकतांत्रिक व्यवस्था के भ्रष्ट तंत्र के दलाल गोदी मीडिया की भेंट चढ़ चुके हैं. प्रतिभाशाली पत्रकारों का कहना है कि वर्ष 2000 के समय आज से 26 साल पहले धनबाद जिला में 100 से 150 के बीच मीडिया कर्मी हुआ करते थे. उस समय झारखण्ड समेत धनबाद में गिने चुने ही अखबार हुआ करते थे. अभी अखबार, न्यूज़ चैनल और वेबसाइट न्यूज़ चैनल की बाढ़ आ गई है. शहर से गांव तक मीडिया कर्मियों का जनसैलाब उमड़ पड़ा है. हर मोहल्ले और गांव की गलियों में मीडिया कर्मी नजर आएंगे. गाड़ियों में प्रेस क्लब का स्टीकर सटा हुआ मिलेगा. धनबाद में एक दर्जन से अधिक तथाकथित प्रेस क्लब है. जिसमें एक प्रेस क्लब ऐसा भी है, जहां वसूलीबाज और निर्जीव यानी दुर्योधन और धृतराष्ट्र जैसे चरित्र वालों का साम्राज्य कायम है. यहां 95 फ़ीसदी गोदी मीडिया कर्मी है, जो सिर्फ सुबह से देर रात तक कोयला, बालू, गो तस्करों, ठेकेदारों, भ्रष्ट अधिकारियों, सड़कछाप नेताओं, अवैध लॉटरी संचालकों, सट्टेबाजों और अवैध धंधेबाजों से वसूली में लगे रहते हैं. यह सभी मतलबी और दोगले किस्म के लोग हैं. मीडिया क्रिकेट टूर्नामेंट और होली मिलन समेत अन्य समारोह के नाम पर यह प्रेस क्लब हर साल करोड़ों रुपए वसूली करता है. वेद प्रकाश ओझा, नीरज कुमार, सूरज कुमार समेत एक दर्जन से अधिक पत्रकार गंभीर बीमारी से तड़प तड़प कर मर गए लेकिन, गोदी मीडिया कर्मी समय पर उनका इलाज कराकर बचा नहीं सके. गोदी मीडिया कर्मी चाहते तो लाखों रुपए खर्च कर सभी पत्रकारों की जान बचा सकते थे. घरवालों के पास जितना पैसा था, उतने में इलाज कराया.
दिवंगत पत्रकारों की विधवा पत्नी और अनाथ बच्चों का कोई नहीं है सहारा
प्रतिभाशाली पत्रकारों का कहना है कि दिवंगत पत्रकारों की विधवा पत्नी और उनके अनाथ बच्चों का कोई सहारा नहीं है. दिवंगत नीरज कुमार की पत्नी और उसकी बच्ची को उसके ससुराल वालों ने श्राद्ध के बाद घर से निकाल दिया. नीरज कुमार की पत्नी का क्या कसूर है. वह अपना और बच्ची का परवरिश कैसे करेगी. दिवंगत पत्रकारों की पत्नी और उनके बच्चों का सहारा बनना तो दूर गोदी मीडिया कर्मी कभी झांकने तक नहीं गए. वेद प्रकाश ओझा, नीरज और सूरज तो बड़े घराना के अखबारों में पत्रकार थे. बड़े लोग तो और भी मतलबी और दोगले होते हैं, वह क्या साथ देंगे. बड़े अखबार के संपादक और वहां काम करने वाले मीडिया कर्मी कभी झांकने भी नहीं गए कि दिवंगत नीरज की पत्नी अपने ससुराल में है या नहीं. फिर गोदी मीडिया गर्मी तो महादोगला है. वह क्या कर सकता है, इसे धनबाद की जनता अच्छी तरह जानती है.
प्रेस कांफ्रेंस के बाद नाश्ता, खाना और 100 रुपये लिए आपस में मारपीट करनेवालों से क्या उम्मीद
प्रतिभाशाली पत्रकारों का कहना है कि हर प्रेस कांफ्रेंस के बाद नाश्ता, खाना और ₹100 के लिए आपस में गोदी मीडिया कर्मी गाली गलौज करते हुए मारपीट करने लगते हैं. ऐसे गोदी मीडिया कर्मियों से क्या उम्मीद कर सकते हैं. ये लोग कहते हैं कि हम लोग लोकतंत्र के चौथा स्तंभ हैं. यह लोग लोकतंत्र के सबसे बड़े अपराधी है. पुलिस अगर नीच है तो यह लोग महानीच है. 95 फ़ीसदी गोदी मीडिया कर्मी तो स्नातक भी पास नहीं किया है. जर्नलिज्म की डिग्री तो किसी के पास भी नहीं है. आम जनता की समस्याओं को ना तो यह लोग अखबार में छापते हैं और ना ही अपने चैनल में प्रसारित करते हैं. पत्रकारिता आज से 20 साल पहले हुआ करती थी. अब सिर्फ चाटुकारिता हो रही है.
