दाऊद इब्राहिम हो या प्रिंस खान, पुलिस और गोदी मीडिया ने बनाया डॉन


 नेशनल क्राइम रिपोर्टर राज सिंह की स्पेशल रिपोर्ट 

दिल्ली । चाहे अंडरवर्ल्ड डॉन हाजी मस्तान उर्फ सुल्तान मिर्जा, दाऊद इब्राहिम उर्फ शोएब खान या धनबाद का डॉन हैदर खान उर्फ प्रिंस खान या फिर कोई और, सभी को लोकतान्त्रिक व्यवस्था की ईमानदार पुलिस और गोदी मीडिया ने डॉन बनाया है. सुल्तान मिर्जा से लेकर दाऊद इब्राहिम, सफीक खान, फहीम खान, प्रिंस खान, अतीक अहमद, मुन्ना बजरंगी, मुख्तार अंसारी समेत देश भर के दर्जनों गैंगस्टर और डॉन शुरुआत में छोटे-मोटे अपराध किया करते थे, लेकिन बाद में गैंग बनाकर तस्करी, हत्या, रंगदारी का उद्योग चलाने लगे. कानून से बचने के लिए कई लोगों ने राजनीति को ढाल बनाया और विधायक सांसद से लेकर मंत्री तक बन गए. यहीं से राजनीति का अपराधीकरण शुरू हो गया. हालांकि सुल्तान मिर्जा सोने की तस्करी तक ही सीमित थे. जनता के बीच उनकी छवि अच्छी थी. राजनीति में आने और चुनाव जीतने के बाद दाऊद ने उनका विकेट गिरा दिया. फिर ड्रग्स के धंधे से लेकर हत्या और रंगदारी का उद्योग चलाने लगा. दाऊद अंडरवर्ल्ड का डॉन बनकर भारत समेत कई देशों में खौफ पैदा कर दिया. उसने आतंकवादी संगठनों से हाथ मिलाकर देश के कई हिस्सों में सीरियल बम ब्लास्ट को अंजाम देने लगा. देश की धड़कन सपनों की नगरी मुंबई के बाजारों, गलियों, मुहल्लों, स्टेशनों और ट्रेनों में बम ब्लास्ट होने लगे. बड़े-बड़े मंदिरों और होटलों पर भी आतंकवादी हमले होने लगे. पूरा देश दहशत और आतंक के साये में डूब गया. सैकड़ो लोगों की जाने चली गई और हजारों लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए. भले ही दाऊद दुबई या पाकिस्तान में अपना आशियाना बनाकर रह रहा हो, लेकिन आज भी भारत के जुर्म की दुनिया पर राज कर रहा है. वहीं दूसरी ओर प्रिंस खान भले ही आतंकवाद का रास्ता नहीं चुना हो, लेकिन यह भी अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद की तरह दुबई या पाकिस्तान में रहते हुए धनबाद समेत कई जिलों और राज्यों में हत्या और रंगदारी का उद्योग चला रहा है. 

 योगी और हिमंता बिस्वा सरमा जैसे सीएम हो तो जुर्म को रोकना कोई मुश्किल काम नहीं 

 लोगों का कहना है कि यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ सिंह और असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा जैसे सीएम हो तो किसी भी राज्य में जुर्म को रोकना कोई मुश्किल काम नहीं है. अपराधियों, गैंगस्टर या फिर डॉन को संरक्षण और फलने फुलने का मौका देने वाली पुलिस ही होती है. चोरी, पॉकेटमारी, छिनतई करने वाला देखते ही देखते अगर माफिया या डॉन बन जाए तो उसके लिए पुलिस ही सबसे बड़ा दोषी या अपराधी है. यूपी और असम में देखिए,वहां के लोग कैसे अमन और चैन की जिंदगी जी रहे है. पुलिस भी वही है और अधिकारी भी वही है, लेकिन शासक अलग है. जैसा शासन होता है पुलिस प्रशासन भी उसी तरह से काम करती है. यूपी और असम में अपराधियों से लेकर गैंगस्टर और माफिया तक का नामोनिशान मिटा दिया गया. जो जीवित बच गया उसने जुर्म की दुनिया को तिलांजलि दे दिया. जबकि झारखंड, बिहार, बंगाल या फिर महाराष्ट्र जैसे कई राज्यों में ऐसा नहीं हुआ है. 

  अपराधियों और गुंडों से शहर चला रही है धनबाद पुलिस 

 आम जनता के बीच चर्चा यही है कि धनबाद पुलिस पिछले 50-60 वर्षों से अपराधियों और गुंडों से शहर चला रही है. ऐसा लगता है कि धनबाद पुलिस को अगर सरकारी वेतन नहीं मिलेगा तो वह भूखे मर जाएगी. सिपाही और हवलदार का वेतन 50 हजार और पुलिस अधिकारियों को एक लाख से अधिक वेतन मिलता है. फिर भी यह लोग अपराधी और गुंडे की गुलामी करते है. कोयला, बालू और गो तस्करों से वसूली करते हैं और उसको बढ़ावा भी देते हैं. अवैध लॉटरी संचालकों और सट्टेबाजों के साथ साथ नशीले पदार्थ के कारोबारियों को भी बढ़ावा देते हैं. वहीं दूसरी ओर आम जनता या निर्दोष के साथ पुलिस क्रूरता के साथ पेश आती है. थाना में फरियादियों के साथ पुलिस गुंडों की तरह व्यवहार करती है. थाना में भी सुनवाई उसी की होती है, जिसकी पैरवी हो, वरना ऐसे लोग थाना से लेकर अधिकारियों के पास जाकर धक्के खाते रहते है. पुलिस कहती है कि हम जनता के सेवक हैं और लोग कहते हैं कि पुलिस अपराधियों की सेवक है. धनबाद जिला में रोजाना 1000 से अधिक अपराधी घटनाएं होती है, लेकिन गिने चुने थानों में बड़ी पैरवी के बाद  5 से 10 के आसपास ही FiR होती है. पुलिस को फोन पर सूचना देने के बाद भी घटनास्थल पर नहीं पहुंचती है, लेकिन वसूली के लिए सड़कों पर 24 घंटे रहती है. पुलिस ही गुंडा ताकतों को बढ़ावा दे रही है. लोगों के बीच चर्चा यह भी है कि जनता के बीच पुलिस के खिलाफ आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है. एक दिन ऐसा समय आएगा कि जनता एकजुट होकर पुलिस वालों को सड़क पर कुत्ते की तरह दौड़ा कर मारेगी. उसके बाद ही पुलिसिया व्यवस्था में सुधार हो सकता है. नेताओं और मंत्रियों का भी वही हाल होगा. क्योंकि पुलिस भी नेताओं और मंत्रियों के इशारे पर ही काम करती है. 

 पुलिस खेल रही है प्रिंस खान गैंग के साथ एनकाउंटर-एनकाउंटर

 लोगों का कहना है कि पुलिस अभी धनबाद का कुख्यात डॉन प्रिंस खान गैंग के साथ एनकाउंटर-एनकाउंटर का एक खेल खेल रही है. जनता की सहानुभूति बटोरने के लिए अपराधियों को कहीं और पकड़ती है. उसके बाद वीरान इलाकों में ले जाकर एनकाउंटर के नाम पर पैर हाथ में गोली मारती है. दिखाने के लिए एक दो पुलिसकर्मी भी जख्मी हो जाते हैं. ताकि धनबाद की जनता को लगे कि पुलिसकर्मी भी मुठभेड़ में घायल हुए हैं. असली एनकाउंटर क्या होता है, यूपी पुलिस से सीखे. धनबाद के डॉक्टरों और व्यवसायियों और जनता को धनबाद पुलिस बेवकूफ बना रही है. प्रिंस खान विदेश में बैठकर अपने गैंग के माध्यम से आज भी हर महीने 5 से 10 करोड़ की रंगदारी वसूल रहा है. इसमें पुलिस और धनबाद की गोदी मीडिया को भी हिस्सा देता है. पुलिस का कहना है कि जनता के टैक्स के सरकारी खजाने से हमको जो वेतन मिलता है. उससे सिर्फ हमारा परिवार का भरण पोषण हो सकता है. रईसों की तरह शौक पूरे नहीं हो सकते हैं. इसलिए हमलोग जुर्म की दुनिया के गैंगस्टर या डॉन या फिर तस्करों से वसूली करते हैं. गोदी मीडिया भी यही काम करती है. लोगों का कहना है कि प्रिंस खान के गैंग के साथ पुलिस फेक एनकाउंटर का खेल खेल रही है, इससे प्रिंस खान को कोई फर्क नहीं पड़ता है. प्रिंस खान के नेटवर्क को पुलिस कभी भी धवस्त नहीं कर सकती है. पुलिस 50-60 सालों में मामूली चोर और बदमाशों का नेटवर्क धवस्त नहीं कर पाई तो प्रिंस खान का नेटवर्क क्या खाक धवस्त करेगी. जिस तरह से लोग अपने फायदे के लिए घरों में कुत्ते पालते हैं, उसी तरह से पुलिस अपराधियों और तस्करों को पाल रही है. 

 प्रिंस खान ने अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम को बनाया अपना आका 

 भारत का मोस्ट वांटेड अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की तर्ज पर वासेपुर के प्रिंस खान की झारखंड, बिहार और यूपी समेत कई राज्यों में हुकूमत चलती है। दाऊद इब्राहिम 1993 और प्रिंस खान 2001 में ईमानदार भारतीय पुलिस से सेटिंग कर पासपोर्ट बनाया और विदेश चला गया। दोनों की कहानी एक जैसी है। दाऊद पहले दुबई फिर पाकिस्तान पहुंच गया। उसी तरह प्रिंस खान भी पाकिस्तान जा पहुंचा। गोपनीय सूत्रों के अनुसार प्रिंस खान अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम को अपना आका बना लिया है और उसी के साथ मिलकर भारत में रंगदारी और हत्या का उद्योग चला रहा है। दाऊद और प्रिंस का अपना अपना क्षेत्र है। जहां अपने शूटरों से खौफनाक खेल को अंजाम दे रहे हैं. 

वासेपुर की नींव एम.ए. जब्बार और एम.ए. वासे ने रखी 

धनबाद के वासेपुर का विकास मुख्य रूप से 1940-50 के दशक में शुरू हुआ, जब एम.ए. जब्बार और एम.ए. वासे जैसे शुरुआती कोयला व्यवसायियों ने यहाँ अपना आधार बनाया। यह क्षेत्र शुरू में बंगाल का हिस्सा था, जो 1956 में बिहार और बाद में 2000 में झारखंड राज्य का हिस्सा बना। धनबाद मुख्य रूप से कोयला खदानों और माफियाओं के इतिहास के लिए जाना जाता है। वासेपुर में 1956 के आसपास लगभग 100 आबादी थी. 70 सालों में यहां की आबादी 2 लाख के आसपास पहुंच चुकी है. वासेपुर आज भी हत्या और प्रतिशोध की आग में जल रहा है. दर्जनों लोगों की लाशें गिरने के बाद भी अमन चैन कायम होने का नाम नहीं ले रहा है. फहीम खान और उसके भांजे प्रिंस खान के बीच अदावत चल रही है. ठेका और रंगदारी के लिए दोनों गैंग आमने-सामने हैं. काली कमाई और वर्चस्व की लड़ाई में कई लोग कब्रिस्तान पहुंच चुके हैं. लोग कहते हैं कि पहले पुलिसकर्मियों के साथ-साथ गोदी मीडिया का भी इन लोगों के घर आना जाना लगा रहता था.  

वासेपुर में कुख्यात शफीक खान की एक जमाने में बादशाहत थी

धनबाद के वासेपुर के कुख्यात शफीक खान की एक जमाने में बादशाहत थी. उसकी हत्या के बाद पुत्र फहीम और शमीम उसी अपराध के मार्ग पर चला. शमीम की भी हत्या हो गयी. फहीम हत्या के एक मामले में जमशेदपुर के घाघीडीह जेल में उम्र कैद काट रहा है. फहीम की बहन नासरीन वासेपुर में ही नासीर खान से ब्याही है. उसके चार बेटे हैं. प्रिंस, गोपी, गॉडविन और बंटी. इधर फहीम के भी तीन बेटे हैं. वे हैं इकबाल, रज्जन और साहेबजादे. हाल के वर्षों मे फहीम के परिवार और नासीर के परिवार में काली कमाई में वर्चस्व को लेकर विवाद शुरू हुआ. फहीम और नासीर के बेटे एक-दूसरे के खून के प्यासे हो गये. दोनों पक्ष एक-दूसरे के खून के प्यासे हैं. मुहल्ले के अमन पसंद लोग परेशान है. वासेपुर की भी यह अजीब विडंबना है कि यहां लंबे समय से गैंगवार चल रहा है. कई लोगों की हत्या हो चुकी है. लेकिन यह रुक नहीं रहा.

 प्रिंस खान के संपर्क में है धनबाद पुलिस और गोदी मीडिया

 देश की कोयला राजधानी धनबाद का कुख्यात डॉन प्रिंस खान के संपर्क में धनबाद पुलिस और गोदी मीडिया है. कभी प्रिंस खान तो कभी धनबाद पुलिस और गोदी मीडिया खुद फोन कर आपस में बातचीत करती है और धनबाद की स्थिति के बारे में बातचीत करती है. यही वजह है कि धनबाद पुलिस और गोदी मीडिया को प्रिंस खान का धमकी भरा ऑडियो और वीडियो मिल जाता है. फिर न्यूज़ चैनल और अखबारों में प्रकाशित और प्रसारित भी हो जाता है. प्रिंस खान रुपए के बल पर पुलिस और गोदी मीडिया के माध्यम से धनबाद में दशशत फैला रहा है. पुलिस के वरीय पदाधिकारी कभी भी इस मामले की जांच नहीं करते हैं की ऑडियो वीडियो कौन भेज रहा है, वीडियो किसके पास आता है. किसी आम आदमी के पास ऑडियो वीडियो आता तो पुलिस उसे गिरफ्तार का जेल भेज देती. पुलिस का रोल भी प्रेस क्लब के धृतराष्ट्र की तरह है.  

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