सबसे बड़ा अपराधी कौन ? सिस्टम या गोदी मीडिया


STAR NEWS के स्टेट एडिटर विजय कुमार की खास रिपोर्ट 

धनबाद । देश आजाद हुए 78 साल बीत गए। आम जनता कहती है कि कई राजनीतिक पार्टियों की सरकार बनी, लेकिन सरकारी सिस्टम सुधरने की बजाय, ऐसा लगता है कि पूरी तरह से  सड़ चुकी है। सड़ा हुआ सिस्टम भ्रष्ट लोगों के लिए ही काम करती है। नंबर वन पर थाना है। कोई भी आम आदमी अपनी फरियाद लेकर थाना पहुंचता है, तो उसके आवेदन पर पुलिस ईमानदारी पूर्वक कार्रवाई नहीं करती है। किसी ताकतवर या सत्ताधारियों के खिलाफ शिकायत हो तो पुलिस, ऐसे पेश आती है, जैसे वह पुलिस से शिकायत कर सबसे बड़ा अपराध कर दिया है। एफआईआर तो दूर सनाह तक दर्ज नहीं किया जाता है। मामूली घटना जैसे गाली गलौज, धक्का मुक्की, मारपीट आदि घटनाओं में भी पुलिस फरियादी की बजाय अपराधियों का ही साथ देती है। जनता के टैक्स के सरकारी खजाने से पुलिस को वेतन मिलता है और ये लोग बदमाशों-गुंडों की मदद करते हैं। क्योंकि पुलिस को वेतन से अधिक अपराधियों से कमाई होती है। यही वजह है कि पुलिस ने इसे बगैर पूंजी के सबसे अधिक कमाई वाला कारोबार बना लिया है। पुलिस के खिलाफ किसी से भी शिकायत करें, चाहे अधिकारी हो या फिर मंत्री, कहीं से भी इंसाफ नहीं मिलता है। क्योंकि कि अवैध कमाई का हिस्सा सभी के टेबल तक पहुंचता है। गोदी मीडिया को भी थोड़ा सा हिस्सा चाटने के लिए मिल जाता है। प्रेस क्लब के 90 प्रतिशत लोग वसूली से ही अपना और परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं। कई लोग तो लग्जरी गाड़ियां और आलीशान मकान तक खरीद चुके हैं।


नगर निगम चुनाव में गोदी मीडिया की बल्ले-बल्ले 

 

जनता कहती है कि नगर निगम चुनाव में गोदी मीडिया की बल्ले बल्ले है। सुबह से रात तक 90 प्रतिशत प्रत्याशियों के पीछे-पीछे 100-200 रुपए के लिए दुम हिलाते चलती है। ताकि देर रात में शराब, शबाब और कबाब की जुगाड़ हो सके। नगर निगम ही नहीं, बल्कि लोकसभा, विधानसभा और पंचायत चुनाव में भी गोदी मीडिया लावारिस कुत्तों की तरह गली गली दौड़ते रहती है। फर्जी उर्फ वसूलीबाज अजय तो रुपए बांटने का टेंडर ले लेता है।


नगर निगम क्षेत्र में पब्लिक टॉयलेट, सफाई, नाली और सड़क की व्यवस्था ठीक नहीं 


 लोगों का कहना है कि नगर निगम क्षेत्र में पब्लिक टॉयलेट, सफाई, नाली और सड़क की व्यवस्था ठीक नहीं है। पब्लिक टॉयलेट जो बना था, उसमें पानी, सफाई और बिजली की व्यवस्था नहीं है और हर बार प्रत्याशी क्षेत्र में विकास की दावें ही करते रहते हैं। सड़क पर ही कूड़ा का भंडार बिखरा हुआ रहता है। दुर्गंध से राहगीरों का गुजरना मुश्किल हो जाता है।   विभाग के अधिकारी न तो क्षेत्र का भ्रमण करते हैं और न ही ठोस व्यवस्था करते हैं।   हर काम का ठेका होता है और ठेकेदार अधिकारियों की जेबें भर देते हैं। कई लोग तो गंदगी फैलाने में माहिर हैं, लेकिन ऐसे लोगों पर भी कानूनी कार्रवाई नहीं होती है। जुर्माना का नियम है, लेकिन जो खुद गुनेहगार है, वह क्या जुर्माना लगाएगा।


अब तो अधिकतर गुंडे-बदमाश और उसकी पत्नियां लड़ रही है चुनाव 


 लोगों का कहना है कि अब तो अधिकतर गुंडे-बदमाश और उसकी पत्नियां चुनाव लड़ रही है। गिने चुने सही लोग ही भाग्य आजमा रहे हैं। प्रत्याशियों के साथ इलाकों में समर्थन करने वाले भी अधिकतर लफंगे बदमाश नजर आ रहे हैं। अगर गुंडे-बदमाश या उसकी पत्नियां जीत भी जाती है तो क्षेत्र में कितना विकास होगा, ये लगभग सभी जानते है। सिर्फ सरकारी खजाने की लूट होगी। एक उपेंद्र चंद्रवंशी है। जिसकी पत्नी पार्षद रह चुकी है, लेकिन एक दिन भी क्षेत्र में नहीं गई। उपेंद्र ही काम के लिए अपने लोगों को ठेका देता था। खुद को पार्षद भी बताता था। थाना में दलाली भी करता था। लोगों का कहना है कि उपेंद्र ही नहीं बल्कि कई लोग थाना के दलाल हैं।

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