आजादी के 79 साल बाद भी ब्रिटिश हुकूमत के तर्ज पर काम कर रही है इंडियन पुलिस

आजादी के 79 साल बाद भी ब्रिटिश हुकूमत के तर्ज पर काम कर रही है इंडियन पुलिस 


स्टार न्यूज के एडिटर विजय कुमार की समीक्षा रिपोर्ट 

दिल्ली। आजादी के 79 साल बाद भी ब्रिटिश हुकूमत के तर्ज पर इंडियन पुलिस काम कर रही है। धनबाद समेत देश के सभी जिलों में थाना की पुलिस दमनकारी नीतियों के साथ काम कर रही है। लोगों का कहना है कि अंग्रेजों के जमाने में पुलिस के बारे में कहा जाता था कि तुम राजा हो और राजा कभी गलती नहीं करता। अंग्रेजी हुकूमत में पुलिस इसी नियम पर काम करती थी। पुलिस को असीम शक्तियां दी गई थीं। पुलिस तब भी जनता के बीच राजा बनकर काम करती थी और आज भी। गोरे शासक पुलिस का इस्तेमाल क्रांतिकारियों की आवाज को कुचलने में करते थे, कमोवेश वही स्थिति आज भी है। अब पुलिस का इस्तेमाल अपना हक मांगने वाले, विरोधियों और आंदोलनकारियों के खिलाफ होता है। ब्रिटिश हुकूमत ने 1861 में जो पुलिस एक्ट बनाया उसमें सिपाही से एसपी तक की नीति दमनकारी है। अंग्रेजी हुकूमत जनता का दमन करके चलती थी। सरकार की दमनकारी नीतियों को अमलीजामा पहनाने का काम पुलिस के जिम्मे था। गोरे शासकों ने अपनी सुविधा के मुताबिक पुलिस एक्ट बनाया। हालांकि समय के साथ पुलिस एक्ट में कुछ परिवर्तन जरूर हुए हैं लेकिन, मौजूदा परिस्थितियों के लिहाज से यह नाकाफी ही हैं। 


अंग्रेज नहीं आते तो न थाना होता और न ही कोर्ट, जेल या पुलिस 

लोगों का कहना है कि विदेशी आक्रांताओं के बाद अंग्रेज भारत नहीं आते तो न थाना होता और न ही कोर्ट, जेल या पुलिस। अंग्रेजों ने भारत पर 190 साल तक राज किया और निर्दोष भारतीयों को कुचलने का काम किया। अंग्रेजों के जमाने की पुलिस, थाना में आम भारतीयों के साथ क्रूरता के साथ पेश आती थी। लाठियां बरसाईं जाती थी। थर्ड डिग्री का इस्तेमाल होता था। निर्दोष लोगों और क्रांतिकारियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेजा जाता था। आज की तरह ब्रिटिश हुकूमत में भी थाना और जेल में भारतीयों की मौत हो जाती थी। जिसे आत्महत्या या बीमारी से मौत हो जाने का नाम दिया जाता था। फांसी भी दी जाती थी और एनकाउंटर की तरह हत्याएं भी होती थी। जैसा की भारतीय पुलिस कर रही है। 

थाना को थानेदारों ने बना दिया रंडीखाना 

धनबाद के एक व्यक्ति ने नाम नहीं छापने के शर्त पर कहा है कि थाना को थानेदारों ने रंडीखाना बना दिया। जो पैसा देता है उसका एफआईआर से लेकर हर काम होता है। धनसार थाना प्रभारी मनोहर करमाली ने तो सारी हदें पार कर दी है। दो पक्षों के बीच मारपीट होने पर एक से सेटिंग कर दूसरे पक्ष पर एफआईआर दर्ज कर देता है। दूसरे पक्ष के आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं करता है। धनसार थाना क्षेत्र में रंडीखाना चलवाने से लेकर जुआअड्डा, शराब अड्डा, गांजा, हेरोइन, सट्टा और अवैध लाॅटरी का कारोबार समेत दर्जनों अवैध कारोबार करवाता है। धनसार थाना प्रभारी या 112 नंबर पर फोन करने के बाद भी थानेदार पुलिस टीम के साथ नहीं आता है। एक उपेंद्र चंद्रवंशी है, जो कई तरह का अवैध धंधे का कारोबार करता है। उसका अक्सर थाना में आना जाना लगा रहता है। पूर्व के थानेदारों जैसे मनोज गुप्ता, भिखारी राम का भी यही हाल था। थानेदारों की बात कौन करे, पूर्व के डीएसपी विधि व्यवस्था मुकेश कुमार, एसएसपी जैसे मनोज रतन चौथे, किशोर कौशल जैसे लोग भी अपराधियों और तस्करों से धनबाद जिला चलाते थे। आवेदन देने के बाद भी लोगों को इंसाफ नहीं मिलता था। 


जनता के टैक्स से सिपाही से लेकर डीजीपी तक को वेतन मिलता है और इंसाफ अपराधियों और तस्करों को मिल रहा 

जनता के टैक्स से सिपाही से लेकर डीजीपी तक को वेतन मिलता है और इंसाफ अपराधियों और तस्करों को मिल रहा है। लोगों का कहना है कि हर सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों से लेकर नेताओं को भी वेतन जनता दे रही है। मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक को वेतन भी जनता के टैक्स से ही मिल रहा है। जबकि थाना या सरकारी कार्यालयों में आम आदमी के साथ लावारिस कुत्तों के जैसा व्यवहार किया जाता है। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर 2 से 3 लाख रुपए वेतन लेते हैं लेकिन मरीज को देखते तक नहीं हैं। धनबाद के सबसे बड़े अस्पताल एस एन एम एम सी एच में मेडिकल कॉलेज के स्टूडेंट्स यानी जूनियर डॉक्टर ही इलाज करते हैं। सदर अस्पताल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तो नर्क जैसी हालत है। दवाएं तक नहीं मिलती है। हर सरकारी कार्यालयों में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार का आलम है। बीडीओ, सीओ ऑफिस, नगर निगम, बिजली विभाग लगभग सभी कार्यालय रिश्वतखोरी का अड्डा बन गया है। 79 सालों में एक भी समस्या का समाधान नहीं हुआ है। रामराज्य में सभी को इंसाफ मिलता था। कोई दुखी नहीं था। न्याय, शांति और समानता थी। सभी लोग मिलकर रहते थे। 



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